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आखिर हरियाणा के लड़को को अपनी दुल्हन खरीदनी क्यों पड़ रही है?

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हमारे देश मे शादियाँ कई अलग अलग रीति रीवाज से की जाती हैं। ये सभी रीति रीवाज धार्मिक और समुदायिक के अनुसार किये जाते हैं लेकिन हरियाणा मे एक अलग ही प्रकार की शादी हो रही है जो किसी भी रीति रीवाज से नही जुड़ी है।

हमारे देश मे दहेज़ प्रथा आम है अक्सर यहाँ लड़के वालों को लाखो दहेज के रूप मे मिल जाते है लेकिन हरयाणा मे लड़को को अपनी शादी के लिए लड़कियो को पैसे देकर शादी करनी पड़ रही हैं, और इस तरह की दुल्हन को हरयाणा मे “मोल की बहु” के नाम से जाना जाता है।

आखिर क्या कारण है कि हरयाणा मे लड़को को शादी के लिए लड़की को पैसे देने पड़ रहे हैं? आइये जानते हैं।

हरयाणा मे जितने भी समुदाय पाए जाते हैं उनमे से ज़्यादातर समुदाय के लोग बेटे के जन्म को एक गर्व की तरह देखते हैं इससे उनका आत्मसम्मान बढ़ता है वहीं दूसरी ओर बेटियों के जन्म से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है। इसलिए वहाँ के लोग बेटों की तरजीह ज़्यादा देते हैं। कई बार अपने भगवान से सिर्फ बेटे के मन्नत मांगते हैं। और लड़कियों की भ्रूण्ड हत्या देखने को मिलती है।

इसी कारण से हरयाणा का लिंग अनुपात हमारे देश मे सबसे कम है। भारत के 2011 के जनगड़ना के अनुसार हरयाणा मे हर एक हज़ार लड़को पर सिर्फ 833 लड़कियाँ जन्म लेती है।

कई बार ऐसा भी मामला आता है की अगर लड़की पैदा हो गयी तो उसे बस घर के काम काज ही करवाते हैं और शिक्षा पर ज़्यादा ध्यान नही देते हैं। इसलिए अक्सर जो लड़के थोड़े उच्चतम शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं उन्हे अपने लेवल की लड़की नही मिलती है जिसके कारण उन्हे दूसरे राज्यों मे अपनी दुल्हन तलाश करनी पड़ती हैं।

सिर्फ उच्चतम शिक्षित ही नही बल्कि न्यूनतम शिक्षित वाले लोगों को भी लड़कियों की संख्या कम होने के कारण लड़कियां नही मिल पा रही है। ऐसे मे वहाँ के लड़के अब दहेज़ नही ले रहे हैं बल्कि शादी करने के लड़की वाले को पैसे दिये जा रहे हैं। और इस तरह की शादियाँ जिसमे लड़की वालों को पैसे दिये जाते हैं ज़्यादातर लड़किया असम, बिहार और झारखंड से होती हैं।

आखिर हरियाणा के लड़को को अपनी दुल्हन खरीदनी क्यों पड़ रही है

क्यूंकि इन राज्यों मे दहेज़ प्रथा चरम सीमा पर है जिसके वजह से लड़कियों की शादी आसान नही होती है। इसलिए जब ऐसे राज्यों मे लड़कियों को शादी के लिए पैसे मिल जाते हैं तो उनके लिए शादी काफी आसान हो जाती है।

लड़कियों की कम जनसंख्या की वजह से हरयाणा मे अब् अंतर जातीय विवाह ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं। ये चीज़ हरयाणा के गाँव मे ज़्यादा देखने को मिल रही है क्यूंकि शहर के लोग् पढ़े लिखे होते हैं तो उन्हे आसानी से हरयाणवी लड़की मिल जाती है।

कई जगहों पर दुल्हन खरीदने का रेट सिर्फ 7 हज़ार रुपये हैं। ऐसे मामलो मे अक्सर लड़कियों की अपनी मर्ज़ी से शादी नही होती है लेकिन परिवार की मजबूरी के कारण उन्हें अपनी शादी करनी पड़ती है।

लेकिन समय के साथ हरयाणा मे लिंग अनुपात मे सुधार देखने को मिल रहे हैं क्यूंकि सरकार द्वारा बेटियों को बचाने के लिए और लोगो के जागरूक के लिए कई मुहीम चलाये गये जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, इत्यादि।

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