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Surrogacy in Hindi. जाने भारत में है क्या है Surrogacy के नियम।

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Surrogacy in Hindi.

जैसे-जैसे दुनिया तरक्की करती जा रही है वैसे वैसे मानव जाति के पास नए-नए प्रॉब्लम उभर कर आ रहे हैं कुछ इस प्रॉब्लम में से एक प्रॉब्लम है शादीशुदा जिंदगी में बच्चों का नहीं पैदा होना।

आजकल बहुत से ऐसे कपल है जो चाह कर भी इनफर्टिलिटी या फिर कोई और वजह से मां-बाप नहीं बन पाते हैं। ऐसे शादीशुदा जोड़ों के लिए Surrogacy उनकी जिंदगी में खुशियां बहाल कर देती है। अभी तक भारत में हजारों लोग सरोगेसी की मदद से मां-बाप बन चुके हैं और सरोगेसी के वजह से मां-बाप बनने का सुख मिला है।

Surrogacy in Hindi

Surrogacy in Hindi

पिछले ही साल बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा सरोगेसी से मां बनी है। और इससे पहले शाहरुख खान और आमिर खान भी सरोगेसी का सहारा ले चुके हैं।

तो आइये जानते हैं आखिर सरोगेसी है क्या और यह कैसे काम करता है?

1) Surrogacy क्या है? Surrogacy in Hindi.

जब एक महिला का किसी शारीरिक समस्या के कारण से गर्भधारण नहीं हो पाता है तो वैसे लोगों के लिए सेरोगेसी वरदान का काम करता है। साधारण शब्दों मे कहा जाए अगर किसी महिला का बच्चा किसी और दूसरी महिला के कोख में पले तो उसे सरोगेसी कहा जाता है।

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Surrogacy के दो प्रकार होते हैं।

I) ट्रेडिशनल
II) जेस्टेशनल

ट्रेडिशनल सरोगेसी में पिता के स्पर्म को मां के एग्स के साथ मिलाया जाता है. जिसके पश्चात ज़्यगोट ( ZYGOTE) बनता है। ज़्यगोट के बनते ही मां के गर्भ में डाल दिया जाता है। इस विधि के अनुसार बच्चों की बायोलॉजिकल मां सरोगेट मदर ही होती है क्योंकि बच्चों का जन्म उसकी अपनी मां के गर्भ से होता है।

वही जेस्टेशनल सरोगेसी में पिता के स्पर्म तथा माता का एगस मिलाने के बाद जो ज़्यगोट बनता है उसे दूसरी महिला के गर्भ में डाल दिया जाता है। इस प्रयोग में बच्चे का बाईलॉजिकल माँ (असल माँ ) और सुररोगेट माँ अलग अलग होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ अमेरिका देश में जेस्टेशनल सरोगेसी की मदद से हर साल लगभग 750 बच्चे पैदा होते हैं।

इसमें दो और प्रकार का सुरोगेसी पाए जाते हैं- परोपकारी सेरोगेसी (Altruistic Surrogacy) और कमर्शियल सेरोगेसी (Commercial Surrogacy).

Altruistic surrogacy: यह सरोगेसी का वह प्रकार है जिसमें शादीशुदा जोड़ा एक दूसरे सरोगेट को अपने साथ रहने के लिए आमंत्रित करता है. और यह शादीशुदा दंपति बच्चों की डिलीवरी तक सरोगेट मदर का पूरा खर्चा उठाता है। बॉलीवुड फिल्म “चोरी चोरी चुपके चुपके ” में Altruistic सुररोगेसी को दिखाया गया है।

Commercial surrogacy: कमर्शिअयाल सरोगेसी का वह प्रकार है जिसमें सरोगेट मदर को बच्चे पैदा करने के लिएभुगतान किया जाता है. हालांकि भारत में कमर्शियल सरोगेसी को बैन कर दिया गया है।

2) भारत में सरोगेसी के नियम।

सरोगेसी एक ऐसा माध्यम है जिसके मदद से शादीशुदा कपल मां बाप बन सकते हैं लेकिन इसमें थोड़ा रिस्क भी होता है कई बार बच्चे सरोगेसी की वजह से अपंग पैदा होते हैं इसके बाद बहुत से ऐसे मामले आए हैं जिसमें बच्चों के असल माता-पिता सरोगेसी से हुए बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया और इसी वजह से भारत में कमर्शियल सरोगेसी को बंद कर दिया गया है।

बहुत से ऐसे देश है जहां पर हर तरह के सरोगेसी को अवैध माना गया है। लेकिन भारत में सरोगेसी मान्य है। लेकिन इसके लिए भारत सरकार ने कुछ नियम बना रखे हैं, क्योंकि बहुत से लोग भारत में इस व्यवसाय का रूप देने लगे। और इसी वजह से भारत सरकार ने इसके लिए बहुत ही सख्त कानून बनाया है।

3) भारत में सरोगेसी की अनुमति किसे दी गई है?

. जो शादीशुदा कपल इन फर्टिलिटी के शिकार है
. जिस कपल को सरोगेसी से कोई व्यावसायिक फायदा ना हो। मतलब कई बार भारत में सरोगेसी का इस्तेमाल बच्चों को पैदा कर और उसे बेचने के लिए इस्तेमाल किया गया है।
. यदि कोई औरत गंभीर बीमारी से जूझ रही है और गर्भधारण नहीं कर सकती तो ऐसे में उसे सरोगेसी की अनुमति दी गई है।

4) कौन बन सकता है सरोगेट और इसके लिए क्या योग्यता चाहिए?

. सरोगेट बन रही महिला का उम्र 25 से 35 साल के बीच में होनी चाहिए।
. वह महिला पहली बार सरोगेट मां बन रही हो।
. वह महिला मेंटली फिट होनी चाहिए, जिसके लिए उसे अस्पताल से सर्टिफिकेट बनवानी पड़ेगी।
. फिर दंपति और सरोगेट को अपना अपना प्रमाण पत्र बनवाना पड़ेगा। और फिर आगे की कार्रवाई होगी।

5) सरोगेसी से जुडी अन्य जानकारियां। Surrogacy in Hindi.

. एक बार कांटेक्ट साइन होने के बाद सरोगेट मां बच्चों का पैदा होने तक अपनी मर्जी से गर्भ खत्म नहीं कर सकती।
.अगर कोई भारतीय विदेश में जाकर सरोगेट की मदद से बच्चा पैदा करता है पैदा होने वाले बच्चों को भारतीय नागरिक नहीं माना जाएगा।
. भारतीय विवाह अधिनियम के अनुसार गे (Gay) कपल्स को सरोगेसी का अधिकार नहीं दिया गया है।
. सेरोगेसी से पैदा हुए बच्चे ज़ब 18 वर्ष पूरा कर लेते हैं तो उन्हें यह जानने का अधिकार है कि वह सरोगेसी से पैदा हुए या फिर नॉर्मल डिलीवरी हुई है।

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